कैंसर की बढ़ती चिंताएँ

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चर्चा में क्यों?

कैंसर पत्रिका में प्रकाशित एक हालिया अध्ययन में पूर्वानुमान किया गया है कि वर्ष 2022 के अनुमान की तुलना में 2050 तक वैश्विक स्तर पर पुरुषों में कैंसर के मामलों में 84.3% की वृद्धि होगी तथा कैंसर से होने वाली मौतों की संख्या में 93.2% की वृद्धि होगी।

  • यह चिंताजनक प्रवृत्ति एक महत्त्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती को रेखांकित करती है, जिस पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।

अध्ययन के मुख्य निष्कर्ष क्या हैं?

  • कैंसर के मामलों और मृत्यु में अनुमानित वृद्धि: अध्ययन में बताया गया है कि 2050 तक पुरुषों में कैंसर के मामले बढ़कर 19 मिलियन हो जाएंगे, जबकि कैंसर से होने वाली मृत्यु 10.5 मिलियन तक पहुँचने की उम्मीद है।
    • विशिष्ट कैंसर प्रकारों का अनुमान: वर्ष 2022 से 2050 तक मेसोथेलियोमा (फेफड़ों के कैंसर का सबसे आम प्रकार) के मामलों में 105.5% की वृद्धि और प्रोस्टेट कैंसर से होने वाली मौतों में 136.4% की वृद्धि होने की उम्मीद है, जबकि वृषण कैंसर में सबसे कम वृद्धि होगी, जिसमें घटनाओं में 22.7% और मृत्यु में 40% की वृद्धि होगी।
  • फेफड़े के कैंसर का प्रभुत्व: फेफड़े के कैंसर के घटना और मृत्यु दर दोनों में अग्रणी प्रकार का कैंसर बने रहने की उम्मीद है, वर्ष 2022 की तुलना में इसमें 87% से अधिक की वृद्धि का अनुमान है।
  • आयु और क्षेत्र के आधार पर असमानताएँ: रिपोर्ट में आयु और क्षेत्र के आधार पर कैंसर की दरों में महत्त्वपूर्ण असमानताएँ बताई गईं हैं, जिसमें वर्ष 2022 में वैश्विक स्तर पर पुरुषों में लगभग 10.3 मिलियन मामले और 5.4 मिलियन मौतें शामिल हैं।
    • इनमें से लगभग दो-तिहाई मामले 65 वर्ष या उससे अधिक आयु के वयस्कों में थे।
  • मानव विकास सूचकांक (HDI) का प्रभाव: रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि वर्ष 2022 से 2050 तक बहुत उच्च HDI देशों में कैंसर के मामलों में 50.2% की वृद्धि होगी और निम्न HDI देशों में 138.6% की वृद्धि होगी।
    • बहुत उच्च मानव विकास सूचकांक वाले देशों में कैंसर से होने वाली मृत्यु दर में 63.9% तथा निम्न मानव विकास सूचकांक वाले देशों में 141.6% की वृद्धि होने की संभावना है।
  • उच्च मृत्यु दर-घटना अनुपात: रिपोर्ट में उच्च मृत्यु दर-घटना अनुपात पर प्रकाश डाला गया है, जिसमें वृद्ध पुरुषों का अनुपात 61% है और निम्न HDI देशों में यह अनुपात 74% है। अग्नाशय के कैंसर जैसे दुर्लभ कैंसर का अनुपात और भी अधिक 91% है, जो खराब उत्तरजीविता परिणामों को दर्शाता है।
    • मृत्यु-से-घटना अनुपात (MIR) एक माप है जो एक निर्दिष्ट अवधि में कैंसर से होने वाली मौतों (मृत्यु दर) की संख्या की तुलना नए कैंसर मामलों (घटना) की संख्या से करता है।

भारत में कैंसर की व्यापकता की स्थिति क्या है?

  • भारत में 2022 में 1,413,316 नए मामले सामने आए, जिनमें महिला रोगियों (6,91,178 पुरुष और 7,22,138 महिलाएँ) का अनुपात अधिक था।
  • 1,92,020 नए मामलों के साथ स्तन कैंसर का अनुपात सबसे अधिक है, जो सभी रोगियों में 13.6 प्रतिशत और महिलाओं में 26 प्रतिशत से अधिक है।
  • भारत में स्तन कैंसर के बाद होंठ और मुख गुहा (1,43,759 नए मामले, 10.2%), गर्भाशय ग्रीवा (Cervix) और गर्भाशय (Uterine), फेफड़े और ग्रासनली कैंसर के मामले सामने आए।
    • एशिया में कैंसर के बोझ का आकलन करने वाले विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के एक हालिया अध्ययन, जिसे द लैंसेट रीजनल हेल्थ में प्रकाशित किया गया था, में पाया गया कि अकेले भारत में वर्ष 2019 में वैश्विक मृत्यु के 32.9% और होंठ और मौखिक गुहा कैंसर के 28.1% नए मामले सामने आए।
    • इसका कारण भारत, बांग्लादेश और नेपाल जैसे दक्षिण एशियाई देशों में खैनी, गुटखा, पान और पान मसाला जैसे धूम्ररहित तंबाकू (Smokeless Tobacco- SMT)) का व्यापक उपभोग है।
      • विश्व भर में मौखिक कैंसर के 50% मामलों के लिये SMT ज़िम्मेदार है।
  • लैंसेट ग्लोबल हेल्थ 2023 के अनुसार वैश्विक स्तर पर गर्भाशय ग्रीवा कैंसर के कारण होने वाली मौतों में से 23% भारत में होती हैं।
    • भारत में गर्भाशय-ग्रीवा कैंसर की पाँच वर्ष की उत्तरजीविता दर 51.7% है, जो संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे उच्च आय वाले देशों की तुलना में कम है।

 

कैंसर:

  • यह एक जटिल और व्यापक शब्द है, जिसका उपयोग शरीर में असामान्य कोशिकाओं की अनियंत्रित वृद्धि तथा प्रसार से होने वाली बीमारियों के एक समूह का वर्णन करने के लिये किया जाता है।
    • ये असामान्य कोशिकाएँ, जिन्हें कैंसर कोशिकाएँ कहा जाता है, स्वस्थ ऊतकों और अंगों पर आक्रमण करने तथा उन्हें नष्ट करने में सक्षम होती हैं।
  • एक स्वस्थ शरीर में कोशिकाएँ विनियमित तरीके से विकसित होती हैं, विभाजित होती हैं और नष्ट हो जाती हैं, जिससे ऊतकों तथा अंगों के सामान्य संचालन की अनुमति मिलती है।
    • हालाँकि कैंसर के मामले में कुछ आनुवंशिक उत्परिवर्तन या असामान्यताएँ इस सामान्य कोशिका चक्र को बाधित करती हैं, जिससे कोशिकाएँ अनियंत्रित रूप से विभाजित और बढ़ती हैं।

 

भारत में कैंसर नियंत्रण के लिये सरकार की क्या पहल हैं?

भारत में कैंसर का शीघ्र पता लगाने पर नीति आयोग की रिपोर्ट की मुख्य तथ्य क्या हैं?

  • कैंसर जाँच में कमी: नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार आयुष्मान भारत स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों (HWC) में कैंसर जाँच में महत्त्वपूर्ण कमी है।
    • इनमें से 10% से भी कम केंद्रों द्वारा कैंसर सहित गैर-संक्रामक रोगों के लिये एक ही बार जाँच की गई थी।
  • स्क्रीनिंग प्रथाएँ:
    • स्तन कैंसर: स्क्रीनिंग स्व-परीक्षण के माध्यम से की जाती है।
    • ग्रीवा कैंसर: स्क्रीनिंग पूरी तरह से लागू नहीं की गई है।
    • ओरल कैंसर: स्क्रीनिंग केस-दर-केस आधार पर की जाती है, जो दिखाई देने वाले लक्षणों पर निर्भर करती है।
  • बुनियादी अवसरंचना और संसाधन: परिचालन दिशानिर्देशों के अनुसार स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों में बुनियादी अवसरंचना, उपकरणों, दवाओं और नैदानिक ​​परीक्षणों का अभाव था।
  • स्टाफ प्रशिक्षण और जागरूकता: स्क्रीनिंग विधियों पर सहायक नर्स मिडवाइफ (ANM) का प्रशिक्षण एवं निगरानी अपर्याप्त है।
    • इसके अतिरिक्त स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र के कर्मचारियों में उच्च रक्तचाप और मधुमेह की वार्षिक जाँच की आवश्यकता के बारे में जागरूकता सीमित थी।

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