
Add to favoritesशिक्षा मंत्रालय के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव श्री संजय कुमार ने आज नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय बाल भवन में महीने भर चलने वाले “समर फिएस्टा 2024” का उद्घाटन किया। समर फिएस्टा एक महीने तक चलने वाला शिविर है जिसमें 5 से 16 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए 30 से अधिक प्रकार की विभिन्न गतिविधियाँ शामिल हैं। इस अवसर पर शिक्षा मंत्रालय के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के अतिरिक्त सचिव (एसएस-II) श्री विपिन कुमार और राष्ट्रीय बाल भवन के अध्यक्ष तथा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
बच्चों और उनके अभिभावकों की उत्साही सभा को संबोधित करते हुए, श्री संजय कुमार ने युवा मन को पोषित करने में इस तरह के इंटरैक्टिव और अभिनव कार्यक्रमों के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ-साथ इस तरह की पाठ्येतर गतिविधियाँ भी बच्चों के भविष्य में सफल होने के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। इसके अलावा, उन्होंने बच्चों को जिज्ञासु बनने और अपने आस-पास की चीजों का पता लगाने के लिए प्रेरित किया, जो उनके दिमाग को खोलने में मदद करेगा।
बच्चों और उनके अभिभावकों की उत्साही सभा को संबोधित करते हुए, श्री संजय कुमार ने युवा मन को पोषित करने में इस तरह के इंटरैक्टिव और अभिनव कार्यक्रमों के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ-साथ इस तरह की पाठ्येतर गतिविधियाँ भी बच्चों के भविष्य में सफल होने के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। इसके अलावा, उन्होंने बच्चों को जिज्ञासु बनने और अपने आस-पास की चीजों का पता लगाने के लिए प्रेरित किया, जो उनके दिमाग को खोलने में मदद करेगा।
इस कार्यक्रम में प्रख्यात कलाकार और अतिथि भी शामिल होंगे जो इन विशेष कार्यक्रमों में भाग लेंगे, अपने अनुभव साझा करेंगे और बच्चों को प्रेरित करने के लिए आकर्षक प्रदर्शन करेंगे। इस पहल को जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है, जिसमें 2500 से अधिक बच्चे पहले ही विभिन्न कार्यशालाओं और कार्यक्रमों में नामांकित हो चुके हैं। सभी प्रतिभागियों के लिए आसान पहुँच की सुविधा के लिए, राष्ट्रीय बाल भवन द्वारा पूरी दिल्ली में परिवहन सुविधाएँ भी उपलब्ध कराई गई हैं।
राष्ट्रीय बाल भवन, शिक्षा मंत्रालय के स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग के तहत एक स्वायत्त निकाय है, जिसकी स्थापना 1956 में हुई थी। इसकी स्थापना बच्चों के लिए सोच, कल्पना, रचनात्मकता और मनोरंजक गतिविधियों के माध्यम से सीखने को बढ़ावा देने की दृष्टि से की गई थी।


