
Add to favoritesकृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने उत्तरी राज्यों द्वारा क्रियान्वित कृषि योजनाओं की मध्यावधि समीक्षा करने के लिए आज नई दिल्ली स्थित कृषि भवन में क्षेत्रीय सम्मेलन आयोजित किया। इस सम्मेलन में पंजाब, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और दिल्ली के प्रमुख अधिकारी प्रगति का मूल्यांकन करने और इन योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन में चुनौतियों का समाधान करने के लिए एकत्र हुए।
बैठक के दौरान सचिव डॉ. देवेश चतुर्वेदी ने राज्यों से समय पर निधि आवंटन सुनिश्चित करके और राज्य अंशदान तथा एकल नोडल खाता (एसएनए) शेष राशि से संबंधित मुद्दों का समाधान करके केंद्र प्रायोजित योजनाओं (सीएसएस) के क्रियान्वयन में तेजी लाने का आग्रह किया। उन्होंने एसएनए-स्पर्श को क्रियान्वित करने, अप्रयुक्त शेष राशि और ब्याज वापस करने और समय पर उपयोगिता प्रमाण पत्र (यूसी) जमा करने के महत्व पर जोर दिया।
सम्मेलन में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई) और कृषोन्ति योजना सहित प्रमुख योजनाओं के कार्यान्वयन में सुधार पर ध्यान केंद्रित किया गया, जहां गैर-निष्पादित राज्यों को वित्तीय वर्ष के शेष महीनों में अपने प्रयासों को बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। डॉ. चतुर्वेदी ने राज्यों को दिसंबर तक वित्त वर्ष 2025-26 के लिए आरकेवीवाई वार्षिक कार्य योजना को अंतिम रूप देने की सलाह दी, ताकि अप्रैल तक पहली किस्त समय पर जारी की जा सके, जिसका उद्देश्य फंड के उपयोग में पिछली देरी को कम करना है।
प्रमुख पहलों की व्यापक समीक्षा की गई, जिसमें ऋण पहुंच बढ़ाने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) मिशन, जोखिम शमन और विस्तारित फसल बीमा के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) और डेटा-संचालित कृषि को आगे बढ़ाने के लिए डिजिटल कृषि मिशन शामिल हैं। सम्मेलन में फसल सर्वेक्षणों में डिजिटल एकीकरण और पीएम किसान के तहत संचालन को सुव्यवस्थित करने के लिए एग्रीस्टैक के साथ राज्य भूमि रिकॉर्ड के संरेखण की आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया।
बैठक में राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन, कीटनाशक अधिनियम के तहत प्रयोगशालाओं के लिए एनएबीएल मान्यता और क्षेत्र के विकास को बढ़ावा देने के लिए कृषि निवेश पोर्टल और कृषि अवसंरचना कोष (एआईएफ) के कुशल उपयोग सहित उच्च प्राथमिकता वाले विषयों पर भी चर्चा की गई।
संयुक्त सचिव (आईसी, तिलहन एवं ऋण) श्री अजीत कुमार साहू ने समीक्षा के लिए एजेंडा निर्धारित किया तथा उत्तरी राज्यों के कृषि विभागों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ जनजातीय मामलों, नाबार्ड और सहकारिता सहित संबद्ध विभागों के प्रतिनिधियों का स्वागत किया।
सम्मेलन का समापन एक ओपन हाउस सत्र के साथ हुआ, जिसमें हितधारकों को कार्यान्वयन बाधाओं को दूर करने और कृषि कार्यक्रमों की पहुंच को अधिकतम करने के बारे में जानकारी प्रदान करने का अवसर मिला। यह क्षेत्रीय सम्मेलन भारत सरकार द्वारा आयोजित एक श्रृंखला का हिस्सा है, जो विशिष्ट क्षेत्रीय कृषि आवश्यकताओं को संबोधित करता है तथा पूरे देश में समान और सतत कृषि विकास का लक्ष्य रखता है।
सम्मेलन में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए, जिनमें अतिरिक्त सचिव सुश्री मनिंदर कौर, डॉ. प्रमोद कुमार मेहरदा, श्री फैज अहमद किदवई, सुश्री शुभा ठाकुर और संयुक्त सचिव श्री प्रवीण कुमार सिंह, श्री सैमुअल प्रवीण कुमार, सुश्री पेरिन देवी, श्री मुक्तानंद अग्रवाल, श्री प्रभात कुमार, श्री बिनोद कुमार, श्री प्रिय रंजन और श्री पूर्ण चंद्र किशन के साथ-साथ सहकारिता मंत्रालय, नाबार्ड और वित्तीय सेवा विभाग के प्रतिनिधि शामिल थे।
यह पहल कृषि अवसंरचना को बढ़ाने, विकास को बढ़ावा देने और सभी क्षेत्रों में किसानों को समर्थन देने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है, यह सुनिश्चित करती है कि प्रत्येक राज्य की अनूठी चुनौतियों और अवसरों को सहयोगी, लक्षित प्रयासों के माध्यम से संबोधित किया जाए।