पिरुल लाओ-पैसे पाओ’ मिशन

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8 मई, 2024 को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य भर में वनाग्नि की स्थिति को ध्यान में रखते हुए ‘पिरुल लाओ-पैसे पाओ’ मिशन (Pirul Lao-Paise Pao Mission) की शुरुआत की।

  • यह मिशन उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले से शुरू किया गया है।
  • इस मिशन के तहत पिरूल कलेक्शन सेंटर पर 50 रुपए किलो के हिसाब से पिरूल खरीदा जाएगा।
  • इस मिशन का संचालन पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड द्वारा किया जाएगा।
  • इसके लिए 50 करोड़ का कार्पस फंड अलग से रखा जाएगा।
  • पिरूल का तात्पर्य चीड़ के पेड़ की पत्तियों से है। पिरूल की सूखी पत्तियां वनों की आग के लिए सबसे बड़ा कारण होती हैं।
  • इसकी उत्कृष्ट ज्वलन क्षमता के कारण उत्तरकाशी जिले के चकोरी धनारी गांव में पिरूल के उपयोग से बिजली पैदा करने के लिए 25 किलोवॉट क्षमता का बिजली संयंत्र स्थापित किया गया है।
  • भारतीय वन स्थिति रिपोर्ट 2021 के अनुसार उत्तराखंड में राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 45.44%(24,305 वर्ग किमी.) वन है।

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