IIT-M टीम ने जल की बूंदों से बनाए मिनरल नैनोपार्टिकल्स

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चर्चा में क्यों?

हाल ही में साइंस जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन से पता चला है कि जल की सूक्ष्म बूंदों में मिनरल (खनिज) को नैनोपार्टिकल्स में तोड़ने की क्षमता होती है।

नोट: सूक्ष्म बूंदों (Microdroplets) के गुण: 

  • जल की सूक्ष्म बूंदें सामान्य वर्षा की बूंदों की तुलना में अत्यधिक छोटी होती हैं, जो वर्षा की बूंद के आकार का केवल एक हज़ारवाँ भाग होती हैं।
  • ये सूक्ष्म बूंदें अपनी घनीभूत प्रकृति के कारण बल्क वाटर की तुलना में रासायनिक प्रतिक्रियाओं में भाग लेने के लिये अधिक उत्सुकता प्रदर्शित करती हैं।
  • सूक्ष्म बूंदें अत्यधिक तीव्रता से रासायनिक अभिक्रिया कर सकती हैं, बल्क वाटर की तुलना में दस लाख गुना अधिक तीव्रता से।
  • ये विद्युत आवेश के उत्कृष्ट वाहक के रूप में कार्य करते हैं।

अध्ययन की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं?

  • प्रयोगात्मक निष्कर्ष:
    • अध्ययन से पता चला कि सूक्ष्म बूंदें सिलिका (SiO2) तथा एल्यूमिना (Al2O3) जैसे मिनरल्स को नैनोपार्टिकल्स में तोड़ सकती हैं।
    • यह जल में निलंबित मिनरल सूक्ष्म कणों पर उच्च वोल्टेज़ प्रवाहित करके प्राप्त किया गया, जिससे वे 10 मिलीसेकंड के भीतर नैनोपार्टिकल्स में टूट गए।
    • मिनरल सूक्ष्म कणों का नैनोपार्टिकल्स में टूटना क्रिस्टल परतों में प्रोटॉन के सिकुड़ने, आवेशित सतहों द्वारा उत्पन्न विद्युत क्षेत्रों और साथ ही सूक्ष्म बूंदों की पृष्ठ तनाव के कारण हो सकता है।
  • संभावित अनुप्रयोग:
    • नैनोपार्टिकल्स निर्माण की इस प्रक्रिया के कृषि पर महत्त्वपूर्ण प्रभाव हो सकते हैं, जैसे सिलिका नैनोपार्टिकल्स की आपूर्ति करके अनुत्पादक मिट्टी को उत्पादक भूमि में परिवर्तित करना।
      • पौधे अपनी लंबाई बढ़ाने के लिये नैनोपार्टिकल्स के रूप में सिलिका को अवशोषित करते हैं।
    • यह जीवन की उत्पत्ति से भी संबंधित है, क्योंकि सूक्ष्म बूंदें प्रोटो-कोशिकाओं की नकल कर सकती हैं, जो संभावित रूप से प्रारंभिक जैव-रासायनिक प्रतिक्रियाओं में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
    • भविष्य में होने वाले अनुसंधान में यह देखा जा सकता है कि क्या जल की सूक्ष्म बूंदें वायुमंडलीय प्रक्रियाओं में मिनरल्स के साथ स्वाभाविक रूप से प्रतिक्रिया करती हैं तथा संभावित रूप से ‘सूक्ष्म बूंदों की बौछार’ के माध्यम से नैनोपार्टिकल्स का निर्माण करती हैं।

नैनोपार्टिकल्स क्या हैं?

  • अंतर्राष्ट्रीय मानकीकरण संगठन (ISO), नैनोपार्टिकल्स ( NPs) को नैनो-ऑब्जेक्ट्स के रूप में परिभाषित करता है, जिनमें नैनोस्केल में सभी बाह्य आयाम होते हैं, जहाँ नैनो-ऑब्जेक्ट की सबसे लंबी एवं सबसे छोटी अक्षों की लंबाई में महत्त्वपूर्ण अंतर नहीं होता है।
  • यदि आयामों में अत्यधिक अंतर हो (आमतौर पर तीन गुना से अधिक), तो नैनोफाइबर अथवा नैनोप्लेट्स जैसे शब्दों को NPs शब्द की तुलना में प्राथमिकता दी जा सकती है।
  • NPs विभिन्न आकार, आकार और संरचना के हो सकते हैं। वे गोलाकार, बेलनाकार, शंक्वाकार, ट्यूबलर, खोखले कोर, सर्पिल आदि या अनियमित हो सकते हैं।
    • NPs का आकार 1 से 100 nm तक कहीं भी हो सकता है। यदि NPs का आकार 1 nm से कम हो जाता है, तो आमतौर पर परमाणु क्लस्टर शब्द को प्राथमिकता दी जाती है। NPs एकल या मल्टी-क्रिस्टल ठोस या किसी अन्य किसी अवस्था साथ क्रिस्टलीय हो सकते हैं। NPs ढीले या कठोर अवस्था में हो सकते हैं।
  • NPs एकसमान हो सकते हैं, या कई परतों से बने हो सकते हैं।
  • वर्गीकरण: उनकी संरचना के आधार पर NPs को आमतौर पर तीन वर्गों में रखा जाता है, अर्थात् कार्बनिक, कार्बन-आधारित और अकार्बनिक।
  • अनुप्रयोग: चिकित्सा, फार्मा, इलेक्ट्रॉनिक्स, कृषि, खाद्य उद्योग आदि में।

 

जल की बूंदें बनाम जलवाष्प
विशेषता पानी की बूंदें जलवाष्प
भौतिक अवस्था तरल गैस
दृश्यता दृश्यमान अदृश्य
निर्माण जलवाष्प का संघनन जल का वाष्पीकरण
उदाहरण बारिश, कोहरा, धुंध, ओस, बादल आर्द्र दिन पर हवा, भाप

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