Z-मोड़ सुरं

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चर्चा में क्यों?

आंध्र प्रदेश में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना (MGNREGS) के तहत चेंचू विशेष परियोजना के बंद होने के परिणामस्वरूप चेंचू जनजाति को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है जिससे उनकी आजीविका, खाद्य सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवा एवं शिक्षा जैसी आवश्यक सेवाओं तक पहुँच पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।

चेंचू कौन हैं?

  • चेंचू (जिसे ‘चेंचुवारु’ या ‘चेंचवार’ भी कहा जाता है) संख्यात्मक रूप से ओडिशा की सबसे छोटी अनुसूचित जनजाति है।
    • उनकी पारंपरिक जीवनशैली शिकार और भोजन संग्रहण पर आधारित रही है।
    • उन्हें सबसे पुरानी तेलुगु भाषी जनजातियों में से एक माना जाता है।
  • ये आंध्र प्रदेश के 12 विशेष रूप से कमज़ोर जनजातीय समूहों (PVTGs) में से एक हैं जो कम साक्षरता और विकास तक सीमित पहुँच वाली जनजातियों को दिया गया वर्गीकरण है।
  • ये मुख्य रूप से वन क्षेत्रों में रहते हैं, जिनमें नल्लामालाई वन और आसपास के क्षेत्र शामिल हैं, तथा यह अपनी आजीविका के लिये वनोपज पर निर्भर होते हैं।

PVTGs के लिये प्रमुख पहल

मनरेगा क्या है?

  • परिचय:
    • यह ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा वर्ष 2005 में शुरू किया गया विश्व का सबसे बड़ा रोज़गार गारंटी कार्यक्रम है।
    • यह प्रत्येक वित्तीय वर्ष में किसी भी ग्रामीण परिवार के वयस्क सदस्यों को (जो वैधानिक न्यूनतम मजदूरी पर अकुशल शारीरिक कार्य करने के इच्छुक हों) सौ दिनों के रोज़गार की कानूनी गारंटी प्रदान करता है।
  • कार्य करने का विधिक अधिकार:
    • पूर्ववर्ती रोज़गार गारंटी योजनाओं के विपरीत, इस अधिनियम का उद्देश्य अधिकार-आधारित ढाँचे के माध्यम से गरीबी के दीर्घकालिक कारणों का समाधान करना है।
    • इसके लाभार्थियों में कम से कम एक तिहाई महिलाएँ होनी चाहिये।
    • न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, 1948 के तहत राज्य में कृषि मजदूरों के लिये निर्दिष्ट वैधानिक न्यूनतम मजदूरी के अनुसार मजदूरी का भुगतान किया जाना चाहिये।

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