
Add to favoritesहाल ही में विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के तहत एक स्वायत्त संस्थान, अगरकर अनुसंधान संस्थान (Agharkar Research Institute- ARI) के वैज्ञानिकों ने भारत के उत्तरी पश्चिमी घाटों में डिक्लिप्टेरा की एक नई प्रजाति की खोज की है, जिसका नाम डिक्लिप्टेरा पॉलीमोर्फा (Dicliptera Polymorpha) है।
प्रजातियों से संबंधित प्रमुख निष्कर्ष क्या हैं?
- डिक्लिप्टेरा पॉलीमोर्फा के अद्वितीय लक्षण:
- अग्नि प्रतिरोधक क्षमता: यह ग्रीष्मकालीन सूखे से बच सकता है तथा घास के मैदानों में लगने वाली आग के प्रति भी अनुकूल हो सकता है।
- फिर से खिलने की प्रकृति: मानसून के बाद (नवंबर-अप्रैल) और फिर आग लगने के बाद मई-जून में खिलता है।
- रूपात्मक विशिष्टता: इसमें पुष्पों की ऐसी संरचनाएँ होती हैं जो भारतीय प्रजातियों में असामान्य हैं, लेकिन अफ्रीकी प्रजातियों में पाई जाने वाली संरचनाओं के समान होती हैं।
- कठोर परिस्थितियों के लिये अनुकूलन:
- यह पश्चिमी घाट के खुले घास के मैदानों की ढलानों पर पनपता है।
- काष्ठीय मूलवृंत दूसरे पुष्पन चरण के दौरान बौने पुष्पीय अंकुर उत्पन्न करते हैं।
- प्रजातियों के लिये खतरा:
- मानव-प्रेरित आग: हालाँकि आग से इस प्रजाति को फिर से पनपने में मदद मिल सकती है, लेकिन बहुत अधिक या खराब तरीके से नियंत्रित आग से इसके आवास को नुकसान पहुँच सकता है।
- आवास का अति प्रयोग: अतिचारण और भूमि-उपयोग में परिवर्तन से चरागाह की जैव विविधता को खतरा है।