उत्तराखंड में चारधाम परियोजना

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चर्चा में क्यों? 

हाल ही में केंद्र ने सर्वोच्च न्यायालय को बताया कि उत्तराखंड में चार प्रमुख तीर्थ स्थलों तक संपर्क सुधारने के लिये बनाई गई चारधाम परियोजना का 75% कार्य पूरा हो चुका है।

मुख्य बिंदु

  • चारधाम परियोजना:
    • इस परियोजना में यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ को बेहतर संपर्क प्रदान करने के लिये 900 किलोमीटर लंबी बारहमासी सड़क का निर्माण शामिल है।
    • यह परियोजना रणनीतिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है क्योंकि यह चीन सीमा के निकटवर्ती क्षेत्रों तक विस्तृत है।
    • नए राजमार्गों से यात्रा आसान और सुरक्षित हो जाएगी, विशेषकर मानसून और सर्दियों के दौरान, जब मौजूदा सड़कें भूस्खलन और अवरोधों के प्रति संवेदनशील हो जाती हैं।
  • निरीक्षण समिति:
    • सर्वोच्च न्यायालय ने इससे पहले पर्यावरण संबंधी चिंताओं के समाधान के लिये सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति ए.के. सीकरी की अध्यक्षता में एक निरीक्षण समिति गठित की थी।
    • समिति ने परियोजना की प्रगति और दिशानिर्देशों के अनुपालन का आकलन करते हुए, अप्रैल 2024 में और 27 अगस्त, 2024 को दो रिपोर्टें सर्वोच्च न्यायालय को सौंपी हैं।
  • पर्यावरण संबंधी चिंताएँ और न्यायालय के आदेश:
    • संवेदनशील हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र से संबंधित पर्यावरणीय चिंताओं के कारण इस परियोजना को विरोध का सामना करना पड़ा।
    • दिसंबर 2021 में, सर्वोच्च न्यायलय ने चारधाम राजमार्ग को डबल-लेन चौड़ा करने की अनुमति दी, लेकिन पर्यावरणीय क्षति को कम करने के लिये सीकरी के नेतृत्व वाली समिति पर निगरानी की ज़िम्मेदारी सौंप दी।
    • निरीक्षण समिति को नए सिरे से पर्यावरणीय प्रभाव आकलन करने का अधिकार नहीं है, लेकिन वह परियोजना के क्रियान्वयन की निगरानी करती है।
  • सरकारी मंत्रालयों से सहायता:
    • समिति को रक्षा, सड़क परिवहन और पर्यावरण मंत्रालयों का पूर्ण समर्थन प्राप्त है .
    • उत्तराखंड सरकार और स्थानीय ज़िला मजिस्ट्रेट भी समिति के साथ सहयोग कर रहे हैं।
    • राष्ट्रीय पर्यावरण अनुसंधान संस्थान और वन अनुसंधान संस्थान (देहरादून) के प्रतिनिधि पर्यावरण निगरानी तंत्र का हिस्सा हैं।

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