
Add to favoritesविज्ञान और किसानों के बीच की दूरी को कम करना होगा: श्री चौहान
आधुनिक कृषि चौपाल का कार्यक्रम जल्द ही शुरू होगा, जिसमें वैज्ञानिक किसानों से चर्चा कर उनकी समस्याओं का समाधान करेंगे: केंद्रीय कृषि मंत्री
हमें शिक्षा, प्रोत्साहन और आधुनिक वैज्ञानिक जानकारी के माध्यम से किसानों को सशक्त बनाना होगा: श्री चौहान
भारत सरकार ऐसी पहलों का समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध है, जो सभी के लिए टिकाऊ और लाभदायक कृषि, लचीले पारिस्थितिकी तंत्र और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करती हैं: केंद्रीय कृषि मंत्री
छात्रों और शोधकर्ताओं को स्थानीय और वैश्विक मृदा चुनौतियों का समाधान करने वाले नवाचारों को विकसित करने में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए: श्री चौहान
मृदा अपरदन न केवल एक राष्ट्रीय मुद्दा है, बल्कि वैश्विक चिंता का विषय है: श्री चौहान
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पूसा नई दिल्ली में आयोजित वैश्विक मृदा सम्मेलन 2024 को संबोधित किया। केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति का मूल मंत्र सभी प्राणियों में एक समान चेतना में विश्वास करना है। हमारे ऋषियों ने सिखाया है कि सभी में एक ही सार्वभौमिक चेतना है, इसलिए पूरा विश्व एक परिवार है, और हमें सभी को अपना मानना चाहिए। यह चेतना केवल मनुष्यों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पशुओं तक भी फैली हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि यह मिट्टी में भी मौजूद है, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मिट्टी निर्जीव नहीं बल्कि जीवित है। श्री चौहान ने कहा कि हमारा शरीर विभिन्न तत्वों से बना है, जिसमें मिट्टी एक प्रमुख घटक है और मिट्टी है, तो ही जीवन है। यदि मिट्टी अस्वस्थ हो जाती है, तो प्राणी भी स्वस्थ नहीं रह सकते। हम एक दूसरे के पूरक हैं, इसलिए यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि मिट्टी स्वस्थ रहे। आज पूरा विश्व मिट्टी के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित है। श्री चौहान ने कहा कि यह धरती केवल हमारी नहीं है, इस पर जीव-जंतुओं और पौधों का भी अधिकार है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि मृदा स्वास्थ्य आज गंभीर चिंता का विषय है। आजादी के बाद से भारत ने कृषि में उल्लेखनीय प्रगति की है। एक समय देश में खाद्यान्न की कमी थी और दूसरे देशों से खाद्यान्न आयात करना पड़ता था। हालांकि, हरित क्रांति ने भारत में महत्वपूर्ण परिवर्तन लाया, केंद्रीय मंत्री ने कहा। अधिक उपज देने वाली फसलों और उनकी किस्मों, बेहतर सिंचाई तकनीकों और आधुनिक कृषि प्रणालियों को अपनाने से लाखों भारतीयों के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित हुई है। इसके बाद, इंद्रधनुष क्रांति ने बागवानी, डेयरी, जलीय कृषि, मुर्गीपालन और अन्य क्षेत्रों के माध्यम से कृषि को और विविधीकृत किया, जिससे कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था का मुख्य स्तंभ बन गई। केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा, “मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि भारत अब सालाना 330 मिलियन टन खाद्यान्न पैदा करता है, जो वैश्विक खाद्य व्यापार में महत्वपूर्ण योगदान देता है और 50 बिलियन डॉलर की निर्यात आय अर्जित करता है।” श्री चौहान ने यह भी कहा कि रासायनिक उर्वरकों पर बढ़ते उपयोग और निर्भरता, प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन और अस्थिर मौसम ने मिट्टी पर दबाव डाला है। आज भारत की मिट्टी एक बड़े स्वास्थ्य संकट का सामना कर रही है। कई अध्ययनों के अनुसार, हमारी 30 प्रतिशत मिट्टी खराब हो चुकी है। मृदा अपरदन, लवणता, प्रदूषण के कारण मिट्टी में आवश्यक नाइट्रोजन और सूक्ष्म पोषक तत्वों की मात्रा कम हो रही है। मिट्टी में कार्बनिक कार्बन की कमी से इसकी उर्वरता और लचीलापन कमजोर हुआ है। ये चुनौतियां न केवल उत्पादन को प्रभावित करती हैं बल्कि आने वाले समय में किसानों के लिए आजीविका और खाद्य संकट भी पैदा करेंगी, ऐसा केंद्रीय मंत्री ने कहा। हमारी सरकार ने मृदा संरक्षण के लिए कई पहल की हैं जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ी है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में 2015 में मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनाने की शुरुआत की गई थी। 220 मिलियन से अधिक कार्ड बनाकर किसानों को दिए जा चुके हैं। मृदा स्वास्थ्य कार्ड के माध्यम से अब किसान जान रहे हैं कि उन्हें कौन सी खाद कितनी मात्रा में डालनी है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना- प्रति बूंद अधिक फसल के तहत हमने पानी के विवेकपूर्ण उपयोग, बर्बादी को कम करने और पोषक तत्वों के अवशेषों को कम करने पर ध्यान केंद्रित किया है उन्होंने यह भी कहा कि रासायनिक खादों से न केवल मिट्टी की सेहत खराब हो रही है, बल्कि मनुष्य और पशुओं का स्वास्थ्य भी खराब हो रहा है। मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के लिए एकीकृत पोषक तत्व और जल प्रबंधन पद्धति अपनानी होगी। हमें सूक्ष्म सिंचाई, फसल विविधीकरण, कृषि वानिकी आदि विभिन्न विधियों के माध्यम से मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार, मिट्टी के कटाव को कम करने और जल भंडारण क्षमता बढ़ाने के सभी उपाय करने चाहिए। श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि युद्ध स्तर पर वैज्ञानिक नवाचारों के समाधान और विस्तार प्रणालियों की भूमिका महत्वपूर्ण है। भारत के कृषि विज्ञान केंद्र भी कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन एजेंसियों के साथ मिलकर किसानों को ज्ञान और कौशल प्रदान करने का काम कर रहे हैं। विज्ञान और किसानों के बीच प्रयोगशाला से जमीन की दूरी को कम करना होगा। हम वैज्ञानिकों से किसानों तक सही जानकारी समय पर पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। कृषि विज्ञान केंद्र भी इस दिशा में कई प्रयास कर रहे हैं। श्री चौहान ने कहा कि हम जल्द ही आधुनिक कृषि चौपाल का कार्यक्रम भी शुरू करने जा रहे हैं, जिसमें वैज्ञानिक लगातार किसानों से चर्चा करेंगे और जानकारी देंगे और समस्याओं का समाधान भी करेंगे। इसके अलावा निजी और गैर सरकारी संगठनों के नेतृत्व वाली विस्तार सेवाओं ने किसानों तक उन्नत तकनीक पहुंचाई है और किसान अब इसका लाभ उठा रहे हैं।
केंद्रीय कृषि मंत्री ने यह भी कहा कि किसान मिट्टी के सबसे बड़े संरक्षक हैं
