
Add to favoritesभारत और कुवैत ने अपने सदियों पुराने संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी में बदल दिया है, जो चार दशकों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की कुवैत की पहली यात्रा है। यह साझेदारी पारंपरिक ऊर्जा व्यापार गतिशीलता से आगे निकल गई है, जिसमें कुवैत के पास वैश्विक तेल भंडार का 6.5% हिस्सा है और यह भारत का छठा सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्त्ता है, जिसमें रक्षा सहयोग, प्रौद्योगिकी अंतरण और बुनियादी अवसंरचना का विकास शामिल है। यह रणनीतिक उन्नयन खाड़ी क्षेत्र में व्यापक भू-राजनीतिक बदलावों को दर्शाता है, जहाँ भारत का बढ़ता आर्थिक और कूटनीतिक प्रभाव क्षेत्रीय स्थिरता और समृद्धि के लिये तेजी से महत्त्वपूर्ण हो गया है।
खाड़ी क्षेत्र क्या है?
- खाड़ी क्षेत्र के संदर्भ में: खाड़ी क्षेत्र, जिसे फारस की खाड़ी क्षेत्र या अरब की खाड़ी क्षेत्र के रूप में भी जाना जाता है, फारस की खाड़ी के आसपास के क्षेत्र को संदर्भित करता है, जो अरब प्रायद्वीप और दक्षिण-पश्चिमी ईरान के बीच स्थित हिंद महासागर का एक सीमांत सागर है।
- खाड़ी क्षेत्र की मुख्य विशेषताएँ:
- भूगोल: इसमें फारस की खाड़ी के सीमावर्ती देश शामिल हैं: बहरीन, ईरान, इराक, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE)।
- सामरिक महत्त्व: फारस की खाड़ी होर्मुज़ जलडमरूमध्य के माध्यम से ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जुड़ी हुई है, जो वैश्विक तेल परिवहन के लिये एक महत्त्वपूर्ण समुद्री मार्ग है।
- खाड़ी भू-राजनीतिक तनावों का केंद्र है, जिसमें अमेरिका और ईरान के बीच विवाद, सऊदी-ईरान प्रतिद्वंद्विता और यमन गृह युद्ध शामिल हैं।
- आर्थिक विविधीकरण के प्रयास: सऊदी अरब और UAE जैसे देश प्रौद्योगिकी, पर्यटन और नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश के माध्यम से तेल पर निर्भरता कम करने के लिये आर्थिक विविधीकरण योजनाओं (जैसे, सऊदी अरब का विज़न- 2030) का अनुसरण कर रहे हैं।
- वैश्विक प्रभाव: खाड़ी देश पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (OPEC), G-20 और संयुक्त राष्ट्र जैसे अंतर्राष्ट्रीय संगठनों में प्रभावशाली भागीदार हैं।
- वे महत्त्वपूर्ण व्यापारिक एवं वित्तीय केंद्र (जैसे, दुबई, अबू धाबी, दोहा) हैं और वहाँ विशेष रूप से दक्षिण एशिया से बड़ी संख्या में प्रवासी श्रमिक रहते हैं।
भारत के लिये खाड़ी क्षेत्र का क्या महत्त्व है?
- ऊर्जा सुरक्षा: खाड़ी क्षेत्र भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिये महत्त्वपूर्ण है, जिसने सत्र 2022-23 में भारत की कhttps://indianepicenter.com/च्चे तेल की मांग की 55.3% की पूर्ति की है और यूक्रेन युद्ध के बाद रूसी आयात में वृद्धि के कारण आई गिरावट से उबर रहा है।
- हाल के समझौते, जैसे कि कतर के साथ वर्ष 2048 तक प्रतिवर्ष 7.5 मिलियन टन LNG आयात करने के लिये 78 बिलियन डॉलर का समझौता, आर्थिक विकास और ऊर्जा परिवर्तन को बनाए रखने के लिये खाड़ी संसाधनों पर भारत की निर्भरता को रेखांकित करते हैं।
- व्यापार और आर्थिक संबंध: खाड़ी भारत का सबसे बड़ा क्षेत्रीय व्यापारिक साझेदार है, जिसने वित्त वर्ष 2022-23 में कुल व्यापार में 15.8% का योगदान दिया, जो यूरोपीय संघ के साथ व्यापार से अधिक है।
- संयुक्त अरब अमीरात भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, तथा सऊदी अरब भारत के बुनियादी अवसंरचना और विनिर्माण क्षेत्रों में चौथे स्थान पर है।
- इन सहयोगों के परिणामस्वरूप विश्वास-निर्माण हुआ है, जिसका उदाहरण 44 बिलियन डॉलर की रत्नागिरी रिफाइनरी जैसी संयुक्त अवसंरचना परियोजनाएँ और क्षेत्रीय स्थिरता पर सक्रिय वार्ता है।
- प्रवासी और धन प्रेषण: लगभग 8.8 मिलियन भारतीय खाड़ी देशों में रहते हैं, जो क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं में महत्त्वपूर्ण योगदान देते हैं तथा भारत में प्रतिवर्ष लगभग 60 बिलियन डॉलर का धन प्रेषण करते हैं।
- यह प्रवासी आबादी भारत-खाड़ी संबंधों में एक महत्त्वपूर्ण सेतु का काम करती है, विशेषकर कोविड-19 महामारी जैसे संकट के दौरान, जब भारत ने वंदे भारत मिशन के तहत प्रत्यावर्तन की सुविधा प्रदान की थी।
- सामरिक और रक्षा सहयोग: डेज़र्ट फ्लैग (UAE) जैसे द्विपक्षीय अभ्यास और भारत-फ्राँस- UAE हवाई युद्ध अभ्यास (डेज़र्ट नाइट) जैसे त्रिपक्षीय सहयोग के साथ रक्षा संबंध प्रगाढ़ हो रहे हैं।
- प्रमुख समुद्री चौकियों से खाड़ी की निकटता, अदन की खाड़ी और अरब सागर की सुरक्षा के लिये भारत की “मिशन-आधारित नौसैनिक तैनाती” में इसके महत्त्व को सुनिश्चित करती है।
- उभरते भू-आर्थिक फ्रेमवर्क: भारत कनेक्टिविटी बढ़ाने और व्यापार मार्गों में विविधता लाने के लिये भारत-इज़रायल- UAE-यूएसए (I2U2) और भारत-मध्य पूर्व-यूरोप कॉरिडोर (IMEC) जैसी पहलों में सक्रिय रूप से भाग ले रहा है।
- हमास-इज़रायल युद्ध की चुनौतियों के बावजूद, ये रूपरेखाएँ क्षेत्र में भारत के बढ़ते भू-आर्थिक प्रभाव का प्रतीक हैं।
- गैर-तेल व्यापार और प्रौद्योगिकी: भारत और खाड़ी क्षेत्र व्यापार में विविधता ला रहे हैं, जिसमें प्रौद्योगिकी, फार्मास्यूटिकल्स और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्र केंद्र बिन्दु के रूप में उभर रहे हैं।
- उदाहरणों में ‘मेड इन इंडिया’ ऑटोमोबाइल का बढ़ता निर्यात और UAE का 15.3 बिलियन डॉलर का FDI शामिल है, जो इसे भारत में निवेश का 7वाँ सबसे बड़ा स्रोत बनाता है।
- इसके अलावा, हाल ही में वर्ष 2024 IPL की नीलामी सऊदी अरब के जेद्दा में आयोजित की गई थी, जो पहली बार देश में इस पैमाने का क्रिकेट आयोजन आयोजित किया गया था।
भारत और खाड़ी के बीच टकराव के प्रमुख क्षेत्र कौन-से हैं?
- भू-राजनीतिक संरेखण और भिन्न हित: I2U2 (भारत-इज़रायल- UAE-USA) में भागीदारी और रक्षा सहयोग सहित इज़रायल के साथ भारत के बढ़ते संबंध, कभी-कभी फिलिस्तीन मुद्दे के प्रति संवेदनशील खाड़ी देशों के बीच असहजता उत्पन्न करते हैं।
- जबकि भारत ने द्वि-राज्य समाधान का समर्थन किया है, विशेष रूप से वर्ष 2023 के हमास-इज़रायल युद्ध के दौरान खाड़ी देशों द्वारा इज़रायल की कार्रवाइयों की आलोचना, भारत के अधिक तटस्थ रुख के विपरीत है जिससे रणनीतिक तनाव उत्पन्न होने का खतरा है।
- उदाहरण के लिये, भारत ने गाज़ा में युद्ध विराम के लिये संयुक्त राष्ट्र का प्रस्ताव पर मतदान में हिस्सा नहीं लिया, इस निर्णय पर खाड़ी भागीदारों की ओर से मिली-जुली प्रतिक्रिया आई।
- ऊर्जा आपूर्ति की कमज़ोरियाँ: यूक्रेन युद्ध के बाद भारत द्वारा तेल आयात में विविधता लाने से, जिसमें वर्ष 2024 में भारत के कच्चे तेल के आयात का 55% हिस्सा रूस द्वारा पूरा किया जा रहा है, खाड़ी देशों की हिस्सेदारी कम हो गई है।
- जबकि मध्य पूर्व के तेल आयात में वर्ष 2023 के मध्य में वृद्धि हुई है, खाड़ी आपूर्तिकर्त्ताओं को प्रतिस्पर्द्धा का सामना करना पड़ रहा है, जिससे भारत के ऊर्जा बाज़ार पर उनका पारंपरिक प्रभुत्व प्रभावित हो रहा है।
- जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के साथ नवीकरणीय ऊर्जा और हरित हाइड्रोजन साझेदारी पर भारत का ध्यान, भारत के ऊर्जा परिदृश्य में खाड़ी की भूमिका को और कम कर सकता है।
- जबकि मध्य पूर्व के तेल आयात में वर्ष 2023 के मध्य में वृद्धि हुई है, खाड़ी आपूर्तिकर्त्ताओं को प्रतिस्पर्द्धा का सामना करना पड़ रहा है, जिससे भारत के ऊर्जा बाज़ार पर उनका पारंपरिक प्रभुत्व प्रभावित हो रहा है।
- व्यापार और FTA वार्ता में गतिरोध: वर्ष 2022 में खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के लिये वार्ता को पुनर्जीवित करने की घोषणाओं के बावजूद, टैरिफ कटौती और गैर-तेल व्यापार विविधीकरण पर असहमति के कारण प्रगति धीमी रही है।
- GCC के साथ व्यापार भारत के कुल व्यापार का 15.8% है, लेकिन फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्रों को मूल्य निर्धारण नीतियों और बाज़ार अभिगम प्रतिबंधों सहित बाधाओं का सामना करना पड़ता है।
- समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक अंतराल: जबकि भारत अरब सागर में समुद्री सुरक्षा में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है, समन्वित समुद्री डकैती विरोधी अभियानों और क्षेत्रीय नौसैनिक साझेदारियों में अंतराल बना हुआ है, जिसका आंशिक कारण खाड़ी देशों की अमेरिका के नेतृत्व वाली सुरक्षा रूपरेखा पर निर्भरता है।
- लाल सागर और अदन की खाड़ी में तनाव के प्रत्युत्तर में वर्ष 2024 में भारतीय नौसेना द्वारा 12 जहाज़ों की तैनाती भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है, लेकिन क्षेत्रीय सुरक्षा नीतियों पर इसके सीमित प्रत्यक्ष प्रभाव को भी उजागर करती है।
- संयुक्त अरब अमीरात और ओमान के साथ द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास जैसी पहल आगे की दिशा में उठाया गया कदम है, लेकिन यह पूरी तरह से एकीकृत खाड़ी-भारत समुद्री सुरक्षा सहयोग से पीछे है।