भारत के ऊर्जा क्षेत्र में रूफटॉप सोलर

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चर्चा में क्यों?

मार्च 2024 तक भारत की कुल स्थापित रूफटॉप सोलर (RTS) क्षमता 11.87 गीगावाट (GW) थी, जिसमें वर्ष 2023-2024 के दौरान स्थापित क्षमता में 2.99 GW की उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई। यह भारत के ऊर्जा क्षेत्र में RTS की पर्याप्त परिवर्तनकारी क्षमता का परिचायक है।

रूफटॉप सोलर कार्यक्रम:

  • परिचय:
    • सरकार ने रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन को बढ़ावा देने के क्रम में वर्ष 2014 में रूफटॉप सोलर कार्यक्रम की शुरुआत की थी।
    • इसका लक्ष्य वर्ष 2022 तक 40 गीगावॉट की स्थापित क्षमता (वर्ष 2030 तक के 100 गीगावॉट में से) प्राप्त करना था, लेकिन वर्ष 2022 तक यह लक्ष्य पूरा न होने के कारण इसकी समय-सीमा को बढ़ाकर वर्ष 2026 तक कर दिया गया।
      • रूफटॉप सोलर पैनल का आशय किसी इमारत की छत पर लगाए गए फोटोवोल्टिक पैनल से है जो विद्युत आपूर्ति की मुख्य इकाई से जुड़े होते हैं।
  • उद्देश्य:
    • आवासीय भवनों में ग्रिड से जुड़ी सोलर रूफटॉप प्रणाली को बढ़ावा देना।
  • ऐतिहासिक संदर्भ:
    • यह कार्यक्रम वर्ष 2010 में जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय सौर मिशन के एक भाग के रूप में शुरू किया गया था।
  • रूफटॉप सोलर के तहत प्रमुख पहल:
    • SUPRABHA (सस्टेनेबल पार्टनरशिप फॉर RTS ऐक्सेलरेशन इन भारत)।
    • SRISTI (सस्टेनेबल रूफटॉप इम्प्लिमेंटेशन फॉर सोलर ट्रांस्फिग्यूरेशन ऑफ इंडिया)।
  • कार्यान्वयन एवं राज्यवार प्रदर्शन:
    • केंद्रीय स्तर पर नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) द्वारा संचालित होने के साथ राज्य नोडल एजेंसियों एवं विद्युत वितरण कंपनियों के माध्यम से इसका निष्पादन होता है।
      • शीर्ष प्रदर्शनकर्त्ता राज्य: गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान।
      • मध्यम प्रदर्शनकर्त्ता राज्य: केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक।
      • अंडर-परफॉर्मर: उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड।

रूफटॉप सोलर कार्यक्रम का महत्त्व:

  • ऊर्जा उत्पादन का विकेंद्रीकरण : इससे केंद्रीकृत विद्युत ग्रिड पर निर्भरता कम होने एवं लक्षित भवनों में सौर पैनल लगाने से ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा मिलता है।
  • आर्थिक लाभ: इससे उपभोक्ताओं की विद्युत ऊर्जा खपत में कमी आने के साथ सौर उद्योग में रोज़गार का सृजन होता है जिससे महँगे ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड की आवश्यकता कम होती है।
  • ऊर्जा स्वतंत्रता: यह उपभोक्ताओं को उत्पादक तथा उपभोक्ता बनाकर जीवाश्म ईंधन एवं ऊर्जा आयात पर निर्भरता को कम करता है।
  • ग्रामीण विद्युतीकरण एवं ऊर्जा विविधीकरण: इससे मुख्य ग्रिड से दूरदराज़ के क्षेत्रों को विद्युत की सुविधा मिलती है, जिससे वंचित समुदायों की जीवन गुणवत्ता में सुधार होने के साथ अधिक विविध ऊर्जा स्रोत मिलता है।
  • सतत् विकास: यह कार्यक्रम संयुक्त राष्ट्र सतत् विकास लक्ष्यों (SDG 7) के साथ संरेखित होने के साथ अक्षय ऊर्जा एवं जलवायु कार्रवाई हेतु भारत की प्रतिबद्धता का समर्थन करता है।

भारत की मौजूदा सौर क्षमता की क्या स्थिति है?

  • भारत की रूफटॉप सौर क्षमता:
    • मार्च 2024 तक भारत में संस्थापित रूफटॉप सोलर पैनल की कुल क्षमता लगभग 11.87 गीगावाट है, जिसमें गुजरात पहले स्थान पर है और उसके बाद महाराष्ट्र दूसरे स्थान पर है।
      • भारत की कुल RTS क्षमता लगभग 796 गीगावाट है।
    • ऊर्जा, पर्यावरण और जल परिषद (Council on Energy, Environment and Water- CEEW) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार कुल रूफटॉप सोलर पैनल की मात्र 20% संस्थापनाएँ आवासीय क्षेत्र में की गई हैं तथा अधिकांश रूफटॉप सोलर पैनल वाणिज्यिक और औद्योगिक क्षेत्रों में हैं।
    • रिपोर्ट के अनुसार भारत के 25 करोड़ घर छतों पर कुल 637 गीगावॉट की क्षमता की सोलर पैनल स्थापित कर सकते हैं जो संभावित रूप से देश के आवासीय विद्युत ऊर्जा की मांग के एक तिहाई भाग की आपूर्ति कर सकती है।
  • कुल संस्थापित क्षमता:
    • नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार दिसंबर 2023 तक भारत में छतों पर स्थापित सोलर पैनल की क्षमता लगभग 73.31 गीगावॉट तक पहुँच गई है। कुल सौर क्षमता के मामले में राजस्थान 18.7 गीगावॉट के साथ शीर्ष पर है। गुजरात 10.5 गीगावॉट के साथ दूसरे स्थान पर है।

नोट

  • भारत का पहला सौर ऊर्जा संचालित गाँव मोढेरा गुजरात में स्थित है और यहाँ 1 किलोवाट की 1,300 RTS सोलर पैनल हैं।

प्रधानमंत्री-सूर्य घर मुफ्त बिजली ऊर्जा योजना क्या है?

  • परिचय: 
    • प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना एक ऐसी योजना है, जिसका उद्देश्य 1 करोड़ घरों में RTS सिस्टम उपलब्ध कराना है।
    • इस पहल के तहत आने वाले घरों को प्रत्येक माह 300 यूनिट बिजली निशुल्क मिल सकती है।
    • यह योजना 3 किलोवाट क्षमता तक की प्रणाली वाले आवासीय उपभोक्ताओं को लक्षित करती है, जो भारत के अधिकांश घरों को कवर करती है।
  • पंजीकरण और स्थापना:
    • स्थापना के लिये, इच्छुक निवासियों को राष्ट्रीय रूफटॉप सोलर पोर्टल पर पंजीकरण कराना होगा और उपलब्ध सूची में से एक विक्रेता का चयन करना होगा।
    • पात्रता के लिये वैध विद्युत कनेक्शन और सौर पैनलों के लिये किसी पूर्व सब्सिडी का प्राप्त न होना आवश्यक है।
  • वित्तीय व्यवस्था:
    • इस योजना को 75,021 करोड़ रुपए के केंद्रीय आवंटन से वित्तपोषित किया गया है, जिसे मुख्य रूप से उपभोक्ताओं को प्रत्यक्ष सब्सिडी के रूप में वितरित किया जाता है।
    • इसमें नवीकरणीय ऊर्जा सेवा कंपनी मॉडल में भुगतान सुरक्षा के प्रावधान शामिल हैं, यह अभिनव परियोजनाओं का समर्थन करता है।
  • प्रमुख लाभ:
    • इसमें मुफ्त बिज़ली, कम बिज़ली बिल, तीन से सात वर्ष तक की भुगतान अवधि, सरकार के लिये कम लागत, नवीकरणीय ऊर्जा को अपनाने में वृद्धि और कार्बन उत्सर्जन में कमी शामिल है।

सौर ऊर्जा का उपयोग करने के लिये सरकार की अन्य पहल क्या हैं?

  • नवीकरणीय ऊर्जा में FDI: नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिये स्वचालित मार्ग के तहत 100% तक FDI की अनुमति।
  • एक सूर्य, एक विश्व, एक ग्रिड
  • प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना (SAUBHAGYA)
  • हरित ऊर्जा कॉरिडोर (GEC)
  • राष्ट्रीय स्मार्ट ग्रिड मिशन (NSGM) और स्मार्ट मीटर राष्ट्रीय कार्यक्रम
  • अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA)
  • राष्ट्रीय सौर मिशन
  • सौर पार्क योजना
  • किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (PM-KUSUM)

RTS से संबंधित विभिन्न चुनौतियाँ और आगे की राह क्या हैं?

                            चुनौतियाँ                       आगे की राह
  • उच्च प्रारंभिक लागत: एक सामान्य 3 किलोवाट आवासीय प्रणाली की लागत लगभग 1.5-2 लाख रुपए (सब्सिडी से पहले) होती है तथा वाणिज्यिक स्थापना के लिये यह लागत 40-50 रुपए प्रति वाट हो सकती है।
  • नीतिगत सुधार: सब्सिडी का विस्तार और सरलीकरण, बड़ी प्रणालियों के लिये सब्सिडी कवरेज में वृद्धि, के साथ-साथ सब्सिडी संवितरण प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करना
  • नवोन्मेषी वित्तपोषण मॉडल: सोलर लीजिंग और पावर पर्चेज़ एग्रीमेंट (PPA) को बढ़ावा देना।
  • सीमित जागरूकता: केवल 20% RTS स्थापनाएँ आवासीय क्षेत्र में हैं (CEEW रिपोर्ट), जो ग्रामीण क्षेत्रों में इसकी स्थापना के लिये एक बड़ी बाधा है।
  • जागरूकता एवं आउटरीच: व्यापक जन जागरूकता अभियान के साथ-साथ सोशल मीडिया और सामुदायिक सहभागिता कार्यक्रमों का लाभ उठाना।
  • ग्रिड एकीकरण चुनौतियाँ: भारत में राजस्थान, गुजरात तथा तमिलनाडु जैसे राज्यों को रुक-रुक कर सौर ऊर्जा उत्पादन के कारण ग्रिड स्थिरता के मुद्दों का सामना करना पड़ता है।
  • ग्रिड आधुनिकीकरण: वितरित सौर उत्पादन को बेहतर ढंग से एकीकृत करने के लिये स्मार्ट ग्रिड प्रौद्योगिकियों में निवेश करना।
    • रुकावट संबंधी समस्याओं का समाधान करने के लिये ऊर्जा भंडारण समाधान को बढ़ावा देना।
  • सौर ऊर्जा के लिये बेहतर पूर्वानुमान एवं प्रबंधन प्रणालियाँ विकसित करना।
  • सीमित कुशल कार्यबल: भारत को वर्ष 2022 तक सौर क्षेत्र में अनुमानतः 300,000 कुशल श्रमिकों की आवश्यकता है तथा कुशल कार्यबल की कमी लक्ष्य पूरा न होने के प्रमुख कारणों में से एक है।
  • क्षमता निर्माण तथा प्रौद्योगिकी एवं नवाचार: ‘सूर्यमित्र’ जैसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों का विस्तार करने के साथ-साथ शैक्षणिक संस्थानों के साथ साझेदारी करना।
  • अधिक कुशल तथा लागत प्रभावी सौर प्रौद्योगिकियों के लिये अनुसंधान एवं विकास में निवेश करना।

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