
Add to favoritesचीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने दोहराया है कि भारत के परमाणु प्रक्षेप पथ की विशिष्टता ‘पहले इस्तेमाल न करने और बड़े पैमाने पर जवाबी कार्रवाई’ के सिद्धांत पर आधारित है। जनरल अनिल चौहान 26 जून, 2024 को नई दिल्ली में सेंटर फॉर एयर पावर स्टडीज – आईआईएसएस सेमिनार द्वारा आयोजित एक सेमिनार में ‘परमाणु रणनीति: समकालीन विकास और भविष्य की संभावनाएं’ पर मुख्य भाषण दे रहे थे।
अपने संबोधन में जनरल अनिल चौहान ने पारंपरिक युद्ध की बदलती प्रकृति और विशेषताओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि परमाणु हथियारों से होने वाला खतरा एक बार फिर भू-राजनीतिक परिदृश्य में केंद्र-मंच पर आ गया है।
सीडीएस ने गहन विचार, नए सिद्धांतों के विकास, निवारण की पुनर्कल्पना और परमाणु C4I2SR (कमांड, नियंत्रण, संचार, कंप्यूटर, खुफिया, सूचना, निगरानी और टोही) बुनियादी ढांचे की सुरक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया।
जनरल अनिल चौहान ने सीएपीएस-आईआईएसएस सेमिनार में एशियाई रक्षा समीक्षा 2024 ‘उभरती प्रौद्योगिकियां और भारत के लिए खतरों के बदलते आयाम’ भी जारी किया।
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