शास्त्रीय भाषा केंद्रों द्वारा स्वायत्तता की मांग

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हाल ही में शास्त्रीय भाषाओं के लिये विशेष केंद्रों की स्वायत्तता को लेकर चिंताएँ बढ़ गई हैं तथा तेलुगु, कन्नड़, मलयालम और ओड़िया को प्रभावी रूप से बढ़ावा देने हेतु उनकी स्वतंत्रता की मांग की जा रही है।

  • भारत छह शास्त्रीय भाषाओं को मान्यता देता है: तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, संस्कृत और ओडिया, जिनमें से प्रत्येक के लिये निर्दिष्ट केंद्र हैं, हालाँकि केवल तमिल केंद्र को स्वायत्तता प्राप्त है।
  • मैसूर में केंद्रीय भारतीय भाषा संस्थान (CIIL) के अंतर्गत तेलुगु, कन्नड़, मलयालम और ओडिया के केंद्र संचालित होते हैं, जिन्हें CIIL पर वित्तीय निर्भरता के कारण कार्यक्रमों के आयोजन और योजना बनाने में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
    • इन केंद्रों के निदेशकों ने स्वायत्तता की मांग की तथा रिपोर्ट प्रस्तुत की, लेकिन उन्हें केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय से कोई अतिरिक्त मार्गदर्शन नहीं मिला।
  • तमिल और संस्कृत को पर्याप्त वित्तीय सहायता प्राप्त है। तमिल स्वायत्त है तथा संस्कृत के लिये समर्पित विश्वविद्यालय हैं, जबकि अन्य शास्त्रीय भाषाएँ सीमित वित्त पोषण व रिक्त पदों के कारण संघर्ष कर रही हैं।
    • उदाहरण के लिये, नेल्लोर स्थित तेलुगु केंद्र और भुवनेश्वर स्थित ओडिया केंद्र में कर्मचारियों की भारी कमी है तथा सीमित वित्तीय संसाधनों के कारण उनका संचालन प्रभावित हो रहा है।
  • भारत सरकार ने वर्ष 2004 में महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक और सांस्कृतिक मूल्य वाली भाषाओं को मान्यता देते हुए उन्हें “भारत में शास्त्रीय भाषा” का दर्जा दिया।
        क्रम.                   भाषा घोषित करने का वर्ष 
          1.                   तमिल         2004
          2.                   संस्कृत         2005
          3.                   तेलुगु         2008
          4.                   कन्नड़         2008
          5.                   मलयालम         2013
          6.                 ओड़िया         2014

 

स्रोत: द हिंदू

हाल ही में पलानी में मुतमिज़ मुरुगन अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन संपन्न हुआ, जो तमिल संस्कृति और आध्यात्मिकता को परिलक्षित करता है। इसमें समग्र विश्व से एक लाख से अधिक श्रद्धालु शामिल हुए।

  • सम्मेलन आयोजन के उद्देश्यों में मुरुगन उपासना के मूल सिद्धांतों का प्रसार करना, उनके दार्शनिक सिद्धांतों को प्राप्य बनाना, विश्व में व्याप्त सभी श्रद्धालुओं को एकजुट करना एवं पुराणों व तिरुमुरै की शिक्षाओं का प्रचार करना शामिल है।
  • भगवान मुरुगन, जिन्हें कार्तिकेय, स्कंद या सुब्रह्मण्य के नाम से भी जाना जाता है, एक हिंदू देवता हैं। वह भगवान शिव और देवी पार्वती की संतान हैं, जिन्हें षट्मुखी और मोर को सवारी के रूप में धारण किये दर्शाया जाता है।
  • मुरुगन तमिलनाडु में प्रमुख हिंदू देवता हैं। उनकी भारत के अन्य क्षेत्रों एवं मलेशिया, सिंगापुर, मॉरीशस, रीयूनियन द्वीप व श्रीलंका में भी उपासना की जाती है।

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