
Add to favoritesचर्चा में क्यों?
हाल ही में श्रीलंका के नए राष्ट्रपति व्यापार, ऊर्जा और समुद्री सहयोग बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करते हुए अपनी पहली भारत यात्रा पर थे।
- भारतीय नेताओं के साथ चर्चा में तमिल आकांक्षाओं, आर्थिक सुधार और चीनी प्रभाव का मुकाबला करने पर ज़ोर दिया गया, तथा भारत की पड़ोसी पहले नीति और सागर विजन को मज़बूत किया गया।
हालिया दौरे के परिणाम क्या हैं?
- आर्थिक और व्यापार समझौते: राष्ट्रपति की भारत यात्रा के दौरान प्रस्तावित आर्थिक और प्रौद्योगिकी सहयोग समझौतों (ETCA) पर भी चर्चा हुई, जिसका उद्देश्य व्यापार संबंधों में सेवाओं और प्रौद्योगिकी को एकीकृत करना है।
- भारत ने भारतीय रुपया (INR)-श्रीलंकाई रुपया (LKR) व्यापार समझौतों को बढ़ावा देने तथा 1,500 श्रीलंकाई सिविल सेवकों के प्रशिक्षण सहित क्षमता निर्माण कार्यक्रम शुरू करने पर सहमति व्यक्त की है।
- ऊर्जा साझेदारी: भारत ने श्रीलंका की तत्काल ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिये उसे LNG की आपूर्ति करने पर सहमति व्यक्त की, जबकि दोनों देशों ने क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने के लिये संयुक्त अरब अमीरात के साथ ऊर्जा पाइपलाइन की घोषणा की।
- त्रिंकोमाली को ऊर्जा केंद्र के रूप में विकसित करने के साथ-साथ अपतटीय पवन ऊर्जा और ग्रिड इंटरकनेक्शन जैसी नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को प्राथमिकता दी गई।
- बुनियादी ढाँचा और कनेक्टिविटी: भारत की “पड़ोसी पहले” नीति के तहत नौका सेवाओं की बहाली और कांकेसंथुराई बंदरगाह, आवास और डिजिटल बुनियादी ढाँचे का निरंतर विकास।
- क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग: दोनों देश सुरक्षा सहयोग, विशेषकर समुद्री सुरक्षा में सहयोग बढ़ाने के लिये प्रतिबद्ध हैं।
- वित्तीय सहायता: खाद्य, ईंधन और दवाओं के लिये 4 बिलियन अमेरिकी डॉलर सहित भारत की वित्तीय सहायता, संकट के दौरान श्रीलंका की अर्थव्यवस्था को स्थिर करने में महत्त्वपूर्ण थी।
- वैश्विक मंचों पर द्विपक्षीय सहयोग: श्रीलंका ने ब्रिक्स समूह में शामिल होने के अपने प्रयास में तथा महाद्वीपीय शेल्फ की सीमाओं पर संयुक्त राष्ट्र आयोग से संबंधित मामलों में भारत से समर्थन मांगा।
भारत और श्रीलंका के बीच सहयोग के क्षेत्र क्या हैं?
- आर्थिक सहयोग: भारत SAARC में श्रीलंका का सबसे बड़ा व्यापार साझेदार है, जिसका द्विपक्षीय व्यापार वित्त वर्ष 2023-24 में 5.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर था।
- भारत आवश्यक वस्तुओं का निर्यात करता है जबकि श्रीलंका को भारत-श्रीलंका मुक्त व्यापार समझौते से लाभ मिलता है।
- विकास सहायता: भारत ने भारतीय विकास और आर्थिक सहायता योजना (IDEAS) के अंतर्गत ऋण सहायता (LOC) के माध्यम से श्रीलंका को विकास सहायता प्रदान की है।
- वर्ष 2023 तक, श्रीलंका को रेलवे, अस्पताल, बुनियादी ढाँचे और विद्युत संचरण जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहायता हेतु 2 बिलियन अमरीकी डॉलर से अधिक की ऋण सहायता (LOC) प्रदान की गई।
- जाफना सांस्कृतिक केंद्र और सुवा सेरिया एम्बुलेंस सेवाओं जैसी परियोजनाओं सहित भारत की ऋण सहायताओं से श्रीलंका का सामाजिक-आर्थिक ढाँचा सुदृढ़ होता है तथा बुनियादी ढाँचे एवं आजीविका में सुधार होता है।
- ऊर्जा सहयोग: जाफना में हाइब्रिड प्रणालियों सहित नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएं , क्षेत्र में ऊर्जा सुरक्षा के लिये भारत के प्रयासों को प्रतिबिंबित करती हैं ।
- रक्षा एवं सुरक्षा: रक्षा संबंधों में संयुक्त सैन्य अभ्यास ( मित्र शक्ति ) और नौसैनिक अभ्यास ( SLINEX ) शामिल हैं।
- समुद्री बचाव समन्वय केंद्र की स्थापना श्रीलंका की समुद्री क्षमताओं को बढ़ाने के लिये भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
- इसके अतिरिक्त, भारत ने श्रीलंका के आतंकवाद-रोधी और पर्यावरण आपदा प्रबंधन प्रयासों का समर्थन किया है।
- सांस्कृतिक और शैक्षिक आदान-प्रदान: दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को छात्रवृत्ति कार्यक्रमों, बौद्ध मंदिरों के जीर्णोद्धार और शासन एवं शिक्षा में भारतीय प्रौद्योगिकियों के आदान-प्रदान के माध्यम से मज़बूत किया गया है।
- समुद्री सहयोग: हिंद महासागर में स्थायी संसाधन प्रबंधन और अवैध मत्स्य संग्रहण के बारे में साझा चिंताओं से सहयोग को बढ़ावा मिला है।
- संयुक्त गश्त और सतत् मत्स्य संग्रहण पहल समुद्री जैवविविधता और आजीविका की रक्षा के लिये महत्त्वपूर्ण हैं।
भारत और श्रीलंका में सहयोग के समक्ष चुनौतियाँ क्या हैं?
- मत्स्य संग्रहण संबंधी विवाद: श्रीलंकाई जलक्षेत्र तथा अन्य क्षेत्रों में भारतीय मछुआरों द्वारा मत्स्य संग्रहण के उपयोग से तनाव बढ़ गया है, जिसके कारण गिरफ्तारियाँ, दंड तथा द्विपक्षीय कूटनीति और तटीय समुदायों में संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
- कच्चातीवु द्वीप विवाद: कच्चातीवु द्वीप का स्वामित्त्व और उपयोग अभी भी विवादास्पद है, तथा भारतीयों को वहाँ मत्स्य संग्रहण और यात्रा करने का अधिकार देने वाले समझौतों के कार्यान्वयन पर असहमति के कारण द्विपक्षीय संबंध तनावपूर्ण हो रहे हैं।
- राजनीतिक और जातीय मुद्दे: कुछ राजनीतिक समूहों ने श्रीलंका में तमिल लोगों को भारत की सहायता का विरोध किया है।
- तमिल बहुल क्षेत्रों को सत्ता हस्तांतरित करने के लिये 13वें संशोधन को लागू करने में देरी एक लंबे समय से चली आ रही शिकायत रही है।
- भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता: श्रीलंका में चीन के बढ़ते प्रभाव से भारत के सामरिक हितों को चुनौती मिल रही है, खासतौर पर हंबनटोटा बंदरगाह जैसी बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं में। चीन द्वारा समर्थित परियोजनाओं को भारत क्षेत्रीय सुरक्षा के लिये खतरा मानता है।
- समुद्री सीमा मुद्दे: दोनों देश अंतर्राष्ट्रीय कानूनी प्रक्रियाओं का उपयोग कर रहे हैं, अफानासी निकितिन सीमाउंट पर संघर्ष अंतर्राष्ट्रीय जल में अतिव्यापी दावों को उजागर करता है तथा कूटनीतिक तनाव उत्पन्न कर सकता है।